Pig House : फ्रांस की महिला ने गुरुग्राम की तुलना ‘सुअरखाने’ से कर निकाली भड़ास, जानिए क्यों भड़की विदेशी महिला ?

मैथिल्डे आर, जिनकी शादी एक भारतीय से हुई है, ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले ट्विटर) पर अपनी निराशा व्यक्त की। उन्होंने लिखा, "कभी-कभी लगता है कि गुरुग्राम छोड़ना ही एकमात्र समझदारी भरा विकल्प है।

Pig House : एक तरफ जहां गुरुग्राम को ‘Cyber City’ के रूप में जाना जाता है, वहीं दूसरी ओर यहां की बदहाल नागरिक सुविधाएं और स्वच्छता की कमी अब शहरवासियों के गुस्से का बड़ा कारण बन रही है । सड़कों पर कूड़े के ऊंचे-ऊंचे ढेर, टूटे हुए फुटपाथ और सीवर के पानी से भरी गलियां लोगों की परेशानी बढ़ा रही हैं। इसी कड़ी में, गुरुग्राम में लंबे समय से रह रहीं एक फ्रांसीसी महिला मैथिल्डे आर ने शहर की स्थिति पर गहरा रोष व्यक्त करते हुए इसकी तुलना ‘सुअर के घर’ (Pig House) से की है। उन्होंने कहा है कि यहां के लोग ‘जानवरों की तरह’ जीवन जीने को मजबूर हैं।

“एक आधुनिक शहर बन गया कूड़े का ढेर”

मैथिल्डे आर, जिनकी शादी एक भारतीय से हुई है, ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले ट्विटर) पर अपनी निराशा व्यक्त की। उन्होंने लिखा, “कभी-कभी लगता है कि गुरुग्राम छोड़ना ही एकमात्र समझदारी भरा विकल्प है। जो एक शानदार, आधुनिक और शांत शहर हो सकता था, वह एक विशाल, रहने लायक नहीं, गंदगी और टूटे-फूटे फुटपाथों से भरा हुआ, ज़मीन के एक विशाल टुकड़े में बदल गया है । कई प्रवासी दोस्त दिल्ली वापस जा रहे हैं या भारत छोड़कर हमेशा के लिए जा रहे हैं, इस उम्मीद के साथ कि विदेश में उन्हें राहत मिलेगी” ।

“लेकिन उनका क्या जो यहाँ फँसे हुए हैं? कई लोग खुद को अभिशप्त महसूस करते हैं, सूअरखाने में जानवरों की तरह रहने के लिए अभिशप्त। अपने अधिकारियों से न तो कोई सम्मान और न ही मदद, जिन पर अब कई लोग भ्रष्ट होने का आरोप लगा रहे हैं। गुरुग्राम के लोगों में निराशा और गुस्सा बढ़ रहा है, जो सोच रहे हैं कि क्या उनके टैक्स से उन्हें एक अच्छा जीवन जीने के बजाय किसी और का महल बन गया है । यह स्थिति कब तक रहेगी? नगरपालिका कब तक पुराने ज़माने की मशीनों और अपशिष्ट निपटान प्रणालियों का इस्तेमाल करती रहेगी, हमारी गायों को मारती रहेगी और सदियों से पोषित या पोषित प्रकृति को प्रदूषित करती रहेगी, जबकि हमारे एशियाई पड़ोसी अच्छे प्रबंधन, निवेश, पर्यटन और भ्रष्टाचार मुक्त नीतियों की बदौलत स्वच्छता और विकास में फल-फूल रहे हैं?

“क्या हमें सचमुच लगता है कि पर्यटक यहाँ आना चाहेंगे, जबकि उन्हें गंदगी और खतरनाक सड़कों पर चलना पड़ेगा? गुड़गांव एक एडवेंचर पार्क का नर्कीय रूप बन गया है। अगर आप घर से बाहर निकलने की हिम्मत करते हैं, तो आपको सीवर और लोगों के मल से होकर गुजरना पड़ सकता है, अपनी गलियों से निकलने की कोशिश में सड़क पर मरना पड़ सकता है, या काम से लौटते समय बिजली का झटका लग सकता है और आपके पास नालियों से भरी गंदगी से भरी नदी पार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। याद रखें, पैसा किसी और के महल के लिए इस्तेमाल किया जाता है। या शायद भविष्य के डिज़्नीलैंड के लिए।”

सफाईकर्मियों की कमी और ‘बांग्लादेशी-रोहिंग्या’ अभियान

यह गंभीर स्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब शहर के कई हिस्सों में सफाईकर्मियों की भारी कमी के कारण गंदगी का अंबार लगा हुआ है। “बांग्लादेशियों-रोहिंग्या” की पहचान को लेकर चलाए जा रहे एक अभियान के कारण बहुत से ऐसे प्रवासी शहर छोड़कर जा चुके हैं, जो कूड़ा उठाने और साफ-सफाई के काम में लगे थे। गौरतलब है कि गुरुग्राम नगर निगम (MCG) का घर-घर से कूड़ा उठाने का काम बड़े पैमाने पर अस्थायी और ठेका कर्मियों के भरोसे चलता है। इन सफाईकर्मियों के अभाव का असर शहर की स्वच्छता पर साफ दिख रहा है।

MCG ने स्वीकारी समस्या, निवासियों में रोष

गुरुग्राम के निवासियों में इस बात को लेकर भी गहरा रोष है कि उनके टैक्स के पैसे का उपयोग उन्हें सम्मानजनक जीवन देने की बजाय ‘दूसरों के किले’ बनाने में किया जा रहा है। यह स्थिति शहर की छवि पर गंभीर सवाल उठाती है और स्थानीय प्रशासन पर नागरिक सुविधाओं को तत्काल बेहतर बनाने का दबाव बढ़ाती है।

Sunil Yadav

सुनील यादव पिछले लगभग 15 वर्षों से गुरुग्राम की पत्रकारिता में सक्रिय एक अनुभवी और विश्वसनीय पत्रकार हैं। उन्होंने कई बड़े नेशनल न्यूज़ चैनलों में ( India Tv, Times Now,… More »
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